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जय हिंद | वंदे मातरम
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जय हिंद | वंदे मातरम
Kanchana Rai बनाम Geeta Sharma मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि— ➡️ विधवा बहू (Widowed Daughter-in-Law) ➡️ हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत ➡️ ससुर की संपत्ति (Estate) से भरण-पोषण पाने की हकदार है। 📌 कोर्ट ने माना कि विधवा बहू Dependent की श्रेणी में आती है और उसका दावा कानूनन विचारणीय है। 🔍 यह फैसला पारिवारिक कानून (Family Law) में एक महत्वपूर्ण नज़ीर है, जो विधवा बहुओं के अधिकारों को मजबूत करता है। 👉 कानून सभी के लिए है — जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है।
State of U.P. vs. Mohammad Arshad Khan (Criminal Appeal No. 5610/2025, dated 19-12-2025) माननीय Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि यदि High Court FIR quash करने से इनकार करती है, तो वह Section 528 BNSS (पूर्व 482 CrPC) के अंतर्गत “No Arrest / No Coercive Action” का संरक्षण नहीं दे सकती। 👉 528 BNSS का उपयोग anticipatory bail के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता। 👉 गिरफ्तारी से संरक्षण हेतु अलग वैधानिक उपाय (Anticipatory Bail) अपनाना आवश्यक है। कानून की सही प्रक्रिया ही न्याय की आधारशिला है। — Advocate Satish Nath (Legal Awareness | Criminal Law)
बारा हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर वकीलों के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के संबंध में NHAI द्वारा वैधानिक व सख़्त कार्रवाई की गई है। 👉 टोल संचालक फर्म का लाइसेंस निरस्त 👉 ₹5.3 करोड़ की ज़मानत राशि ज़ब्त 👉 टोल संचालन नई एजेंसी को सौंपा गया यह प्रकरण दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकारों एवं वकील समाज के सम्मान की रक्षा के लिए कानून पूरी मजबूती से कार्य करता है। — Advocate Satish Nath (Legal Awareness | Rule of Law)
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